Thursday, September 18, 2025

Top Sexologist in Patna Psycho SD Problems Dr Sunil Dubey

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क्या आप जानते हैं कि मनोवैज्ञानिक यौन समस्याओं का इलाज केवल एक विशेषज्ञ आयुर्वेदिक सेक्सोलॉजिस्ट द्वारा ही किया जाता है, जो मानव कामुकता, समाजशास्त्र, मानव मनोविज्ञान और यौन रोग के विशेषज्ञ हों? यौन समस्याएँ कई प्रकार की होती हैं जिनके मूल कारण शारीरिक, मनोवैज्ञानिक या दोनों का संयोजन होते हैं। विश्व प्रसिद्ध आयुर्वेदाचार्य डॉ. सुनील दुबे, जो पटना के सर्वश्रेष्ठ आयुर्वेदिक सेक्सोलॉजिस्ट हैं, कहते हैं कि अधिकांश यौन समस्याएँ शारीरिक और मनोवैज्ञानिक कारकों के संयोजन से जुड़ी होती हैं। वे आयुर्वेदिक सेक्सोलॉजी चिकित्सा के विशेषज्ञ हैं और दुबे क्लिनिक में अभ्यास करते हैं और पुरुषों, महिलाओं, जोड़ों और युवाओं को अपनी व्यापक यौन चिकित्सा प्रदान करते हैं, जो किसी भी प्रकार के यौन रोग के कारण अपने विवाहित या व्यक्तिगत जीवन से जूझ रहे हैं।

जैसा कि हम सभी जानते हैं, वह भारत के सबसे सफल क्लिनिकल सेक्सोलॉजिस्ट हैं, जो यौन समस्याओं पर शोध करने और उनका इलाज करने के लिए अधिकृत हैं। वह और दुबे क्लिनिक की विशेषज्ञ टीम उन सभी लोगों की सेवा के लिए समर्पित हैं जो आयुर्वेद के समग्र दृष्टिकोण के तहत अपनी संपूर्ण यौन समस्याओं का स्थायी समाधान चाहते हैं। डॉ. सुनील दुबे साढ़े तीन दशक से इस सेक्सोलॉजिस्ट पेशे से जुड़े हैं, जहाँ उन्होंने विभिन्न पुरुष और महिला यौन विकारों पर सुरक्षित और प्रभावी आयुर्वेदिक दवाओं के लिए सफलतापूर्वक शोध किया है। आज के समय में, न केवल बड़ी-हस्तियां बल्कि समाज के सभी समुदाय उनसे जुड़े हुए है। वैसे भी, गुप्त व यौन समस्या के निदान के लिए सेक्सोलॉजिस्ट डॉक्टर का सामाजिक जुड़ाव अनिवार्य है जिससे वे उनके समस्त समस्या को समझ सके।

आज के सत्र में हम आपके लिए मनोवैज्ञानिक यौन समस्याओं से जुड़ी सबसे महत्वपूर्ण जानकारी लेकर आए हैं। दरअसल, यह जानकारी हमने डॉ. सुनील दुबे के शोध प्रबंध से ली है, जो उन्होंने अपनी "आयुर्वेद और सेक्सोलॉजी" शीर्षक में इसका जिक्र किया है। आशा है कि यह जानकारी उन सभी लोगो के लिए लाभप्रद होगी, जो अपने जीवन में इस समस्या के साथ संघर्ष कर रहे है।

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पुरुषों में होने वाली मनोवैज्ञानिक यौन समस्याएँ क्या हैं?

हमारे आयुर्वेदाचार्य व सेक्सोलोजी विज्ञान के एक्सपर्ट डॉ. सुनील दुबे ने बताया है कि मनोवैज्ञानिक यौन समस्याएँ, जिन्हें मनोयौन विकार के नाम से भी जाता है, वे यौन कठिनाइयाँ हैं जो किसी व्यक्ति में होने वाली शारीरिक कारणों के बजाय मानसिक या भावनात्मक कारणों से उत्पन्न होती हैं। पुरुषों में होने वाली बहुत-सारे यौन समस्याओं का एक शारीरिक आधार तो होता ही है, लेकिन अक्सर उसके एक मनोवैज्ञानिक पहलू भी होता है, और ये दोनों पहलु आपस में जुड़े रह सकते सकते हैं। उदाहरण के लिए कहे तो, इरेक्टाइल डिसफंक्शन (स्तंभन दोष) जैसी शारीरिक समस्या किसी व्यक्ति के जीवन में चिंता का कारण बन सकती है, जो आगे चलकर शारीरिक समस्या को और बदतर बना देती है। फिर यह स्थिति, व्यक्ति के लिए शारीरिक कम मानसिक होने लगती है।

पुरुषों में होने वाली आम मनोवैज्ञानिक यौन समस्याओं में शामिल हैं:

  • इरेक्टाइल डिसफंक्शन (ईडी): मूल रूप से देखा जाय तो यह एक शारीरिक यौन समस्या है क्योकि इस स्थिति में व्यक्ति को स्तंभन में कठिनाई या इसके प्रबंधन में परेशानी होती है। ईडी के शारीरिक कारण होने में हृदय रोग या मधुमेह जैसी बीमारियां मुख्य भूमिका निभाता है। पुरुषों में होने वाली यह यौन समस्या अक्सर उनके मनोवैज्ञानिक कारकों से जुड़ा होता है। इनमें व्यक्ति के प्रदर्शन की चिंता, यौन क्रिया के दौरान प्रदर्शन न कर पाने का डर, साथ ही तनाव, अवसाद और कम आत्मसम्मान की भावना शामिल हैं।
  • शीघ्रपतन (पीई): आज के समय में, हरेक तीन में से एक पुरुष इस समस्या से परेशान है। वास्तव में देखा जाय तो, यह चरमोत्कर्ष तक पहुँचने और स्खलन में देरी करने में व्यक्ति की असमर्थता है, जो अक्सर एक या दोनों भागीदारों के लिए असंतोष का कारण बनता है। हालाँकि सैद्धांतिक रूप से, कुछ न्यूरोबायोलॉजिकल कारक भी इसमें शामिल हो सकते हैं, लेकिन शीघ्रपतन ऐतिहासिक रूप से और अक्सर मनोवैज्ञानिक कारणों से ही जुड़ा होता है, जैसे चिंता, तनाव, या पिछले अनुभवों से सीखे गए व्यवहार के पैटर्न आदि से। इसकी उपचार प्रक्रिया की समयावधि व्यक्ति विशेष पर निर्भर करती है, क्योकि इसका उपचार में व्यक्ति को धैर्य, निरंतरता, व खुद पर किये कार्य मुख्य रूप से शामिल होते है।
  • बाधित या हाइपोएक्टिव यौन इच्छा: किसी भी व्यक्ति के लिए, यह यौन इच्छा में रुचि की कमी या पूर्ण अनुपस्थिति का होना दर्शाता है। इसके मनोवैज्ञानिक कारणों में अवसाद, चिंता, तनाव, रिश्ते की समस्याएं और पिछले यौन आघात शामिल हो सकते हैं। आज के समय में, इसे "लो लिबिडो" के नाम से जाना जाता है।
  • पुरुष कामोन्माद संबंधी विकार: वास्तव में, यह स्थिति व्यक्ति में पर्याप्त यौन उत्तेजना के बावजूद चरमोत्कर्ष तक पहुँचने में असमर्थता, या चरमोत्कर्ष में महत्वपूर्ण देरी से संबंधित है। वैसे तो, यह समस्या व्यक्ति में एक नियत समय के बाद विकसित होता है, जिसके संभावित कारक हॉर्मोन का असंतुलन, ख़राब जीवनशैली, रिश्तो में तनाव, निश्चित दवा का सेवन आदि शामिल है।

पुरुषों में होने वाले मनोवैज्ञानिक यौन समस्या के सामान्य कारण:

वास्तविक रूप से, कई ऐसे मनोवैज्ञानिक और भावनात्मक कारक पुरुषों में उनके यौन समस्याओं में योगदान दे सकते हैं, जिनमे कुछ सामान्य कारक निम्नलिखित है:

  • मानसिक स्वास्थ्य की स्थितियाँ: अवसाद, चिंता और अन्य मानसिक बीमारियाँ किसी भी व्यक्ति में होने वाले यौन रोग से गहराई से जुड़ी होती हैं। ये कारक न केवल व्यक्ति के भावना को प्रभावित करती है बल्कि रिश्तों में टकराव की स्थिति भी उत्पन्न करती है।
  • तनाव: काम, जीवन या रिश्तों से जुड़ा उच्च स्तर का तनाव किसी व्यक्ति के उसके यौन भावनाओं और कार्यक्षमता में बाधा डाल सकता है। यह व्यक्ति के गुणवत्ता को प्रभावित करता है।
  • प्रदर्शन संबंधी चिंता: यह एक बहुत ही सामान्य कारण है, जहाँ पुरुष अपनी यौन क्षमता व इसके प्रर्दशन को लेकर इतना चिंतित हो जाता है कि यह चिंता उसे उसके यौन कार्य व क्रिया को सही रूप से व्यक्त करने में कठिनाई पैदा करती है।
  • रिश्तों की समस्याएँ: संघर्ष, संवादहीनता, या साथी के साथ सामान्य मनमुटाव या ऊब व्यक्ति के लिए उसके यौन कठिनाइयों का कारण बन सकती है। यह वैवाहिक जीवन में क्लेश का कारण भी बनता है।
  • पिछला आघात: यौन शोषण या अन्य दर्दनाक यौन अनुभवों का इतिहास यौन स्वास्थ्य और कार्यप्रणाली पर गहरा और स्थायी प्रभाव डाल सकता है।
  • अपराधबोध और कम आत्मसम्मान: अपराधबोध की भावनाएँ (जैसे, बेवफाई या अन्य व्यक्तिगत समस्याओं के कारण) या खराब शारीरिक छवि पुरुष की कामुकता पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकती हैं। इससे व्यक्ति में खुद के प्रति निराशा की भावना की स्थिति भी उत्पन्न होने लगती है।
  • अज्ञानता या गलत जानकारी: उचित यौन शिक्षा का अभाव, साथ ही यौन क्रिया से संबंधित सामाजिक या सांस्कृतिक वर्जनाएं, चिंता और झिझक पैदा कर सकती हैं। गलत जानकारी के कारण, व्यक्ति अपने जीवन में मनोवैज्ञानिक स्वास्थ्य से जूझ सकता है।

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मनोवैज्ञानिक यौन समस्याओं का उपचार व निदान पद्धति:

भारत के सीनियर व बिहार के सर्वश्रेष्ठ सेक्सोलॉजिस्ट डॉ. सुनील दुबे बताते है कि अधिकांश मनोवैज्ञानिक यौन समस्याओं का इलाज संभव है। आयुर्वेद के समग्र दृष्टिकोण के तहत, इन समस्याओं के उपचार में अक्सर कई तरीकों का संयोजन को शामिल किया है, जो पीड़ित व्यक्ति को व्यापक व गुणवत्तापूर्ण उपचार प्रदान करते है।

मनोचिकित्सा: एक आयुर्वेदिक सेक्सोलॉजिस्ट, जो मनोवैज्ञानिक या यौन थेरेपिस्ट जैसे मानसिक स्वास्थ्य पेशेवर में विशेषज्ञता रखता हो, व्यक्तियों या जोड़ों को अंतर्निहित मनोवैज्ञानिक समस्याओं से निपटने में मदद कर सकता है। इसमें शामिल हो सकते हैं:

  • संज्ञानात्मक व्यवहार थेरेपी (सीबीटी): यौन संबंधी नकारात्मक विचारों की पहचान करना और उन्हें बदलने में मदद करना।
  • यौन चिकित्सा: विशेष रूप से यौन समस्याओं पर ध्यान केंद्रित करना और भागीदारों के बीच संचार और अंतरंगता में सुधार करना।
  • युगल परामर्श: उन संबंधों के टकरावों का समाधान करना जो इस समस्या में योगदान दे सकते हैं।

अंतर्निहित मानसिक स्वास्थ्य स्थितियों का समाधान: यदि यौन समस्याएँ किसी बड़ी समस्या, जैसे अवसाद या चिंता, का लक्षण हैं, तो अंतर्निहित स्थिति का इलाज करना ज़रूरी है। इसमें दवा और थेरेपी शामिल होता है।

जीवनशैली में बदलाव: इस स्थिति में तनाव कम करना, पर्याप्त नींद लेना, व्यायाम करना और स्वस्थ आहार लेना, ये सभी यौन स्वास्थ्य पर सकारात्मक प्रभाव डालने में मदद करते हैं।

आयुर्वेद मनोवैज्ञानिक यौन समस्याओं को कैसे देखता है?

आयुर्वेद, प्राचीन भारतीय चिकित्सा पद्धति, मन, शरीर और आत्मा को परस्पर संबद्ध मानते हुए, मनोवैज्ञानिक यौन समस्याओं को समग्र रूप से देखता है। यह शारीरिक समस्याओं को मनोवैज्ञानिक समस्याओं से अलग नहीं करता, बल्कि उन्हें शरीर की मूल ऊर्जाओं, या दोषों (वात, पित्त और कफ) और मानसिक स्थिति में असंतुलन की अभिव्यक्ति के रूप में देखता है। आयुर्वेद कारण-आधारित उपचार प्रदान करता है, जो न केवल समस्या के लक्षण बल्कि स्वास्थ्य के समस्त समस्या के मूल कारण पर ध्यान केंद्रित करता है जिसका उद्देश्य समस्त स्वास्थ्य का कल्याण से है।

मनोयौन समस्याओं के लिए आयुर्वेदिक दृष्टिकोण में प्रमुख अवधारणाएँ:

मन-शरीर संबंध: आयुर्वेद इस बात पर हमेशा ज़ोर देता है कि मन (मनस) और शरीर के बीच गहरा संबंध है। व्यक्ति में होने वाला चिंता, क्रोध, भय और कम आत्म-सम्मान जैसे भावनात्मक और मानसिक तनाव, यौन स्वास्थ्य सहित शारीरिक कार्यों को सीधे तौर पर प्रभावित करते हैं। इन समस्याओं को अक्सर मानसिक क्लेब्य (मनोवैज्ञानिक नपुंसकता) भी कहा जाता है।

दोषों (ऊर्जा का असंतुलनकी भूमिका: किसी भी शारीरिक या यौन समस्या में दोषों का असंतुलन एक प्राथमिक कारण माना जाता है।

  • वात दोष: वात गति, तंत्रिका तंत्र और मन से जुड़ा होता है। वात के बढ़ने से व्यक्ति में चिंता, तनाव और तंत्रिका तनाव हो सकता है, जो शीघ्रपतन या इच्छा में कमी जैसी समस्याओं के रूप में प्रकट होता है।
  • पित्त दोष: पित्त अग्नि, चयापचय और जुनून से जुड़ा होता है। पित्त की अधिकता क्रोध, हताशा और अत्यधिक तीव्र, प्रदर्शन-प्रेरित मानसिकता का कारण बन सकती है, जो विरोधाभासी रूप से यौन रोग का कारण बनता है।
  • कफ दोष: कफ स्थिरता, संरचना और चिकनाई से जुड़ा है। कफ को आमतौर पर यौन स्वास्थ्य के लिए सहायक माना जाता है, लेकिन इसके असंतुलन से सुस्ती, इच्छा की कमी या विलंबित स्खलन होने की संभावना होती है।

ओजस: आयुर्वेद में यह एक महत्वपूर्ण अवधारणा है। ओजस शरीर के सभी ऊतकों का सूक्ष्म, शुद्ध सार है, जो जीवन शक्ति, प्रतिरक्षा और समग्र स्वास्थ्य का प्रतिनिधित्व करता है। यौन ऊर्जा ओजस की एक शक्तिशाली अभिव्यक्ति है। जब मन तनावग्रस्त होता है या शरीर असंतुलित होता है, तो ओजस क्षीण हो सकता है, जिससे व्यक्ति में उसका यौन इच्छा और प्रदर्शन में गिरावट आ सकती है।

शुक्र धातु: यह शरीर का सातवाँ और अंतिम ऊतक (धातु) है, जो प्रजनन प्रणाली और यौन द्रव्यों का प्रतिनिधित्व करता है। आयुर्वेद का मानना ​​है कि स्वस्थ यौन क्रिया और प्रजनन क्षमता के लिए शुक्र धातु का समुचित कार्य आवश्यक है। शुक्र धातु में असंतुलन, जो अक्सर खराब आहार, जीवनशैली या मानसिक तनाव के कारण होता है, यौन विकारों का प्रत्यक्ष कारण माना जाता है।

Dr. Sunil Dubey, Senior Sexologist of India

यौन समस्याओं के लिए आयुर्वेदिक उपचार विधियाँ:

मनोयौन समस्याओं का आयुर्वेदिक उपचार व्यापक होता है और इसका उद्देश्य व्यक्ति के मन, शरीर और दोषों में संतुलन बहाल करना है। यह केवल लक्षणों को ही नहीं, बल्कि मूल कारण को भी संबोधित करता है। यही कारण है कि आयुर्वेद हमेशा रामबाण उपचार प्रदान करता है। यह उपचार शरीर में समग्र स्वास्थ्य की बेहतरी के साथ-साथ यौन समस्या से भी पूरी तरह निजात दिलाता है।

वाजीकरण चिकित्सा: यह आयुर्वेद की एक विशिष्ट शाखा है जो यौन स्वास्थ्य, पौरुष शक्ति और प्रजनन क्षमता में सुधार के लिए समर्पित है। इसमें प्रजनन प्रणाली को मज़बूत बनाने और शरीर को पोषण देने के लिए हर्बल उपचार, विशेष आयुर्वेदिक भस्म, आहार परिवर्तन और जीवनशैली में बदलाव सहित कई तरह की चिकित्सा पद्धतियों का उपयोग किया जाता है। इसका लक्ष्य केवल कार्यक्षमता में सुधार करना नहीं है, बल्कि एक स्वस्थ मन और शरीर का निर्माण करना भी है जिससे स्वस्थ संतान पैदा हो सके।

सत्वजय चिकित्सा (आयुर्वेदिक मनोचिकित्सा): यह मनोवैज्ञानिक यौन समस्याओं का एक प्रमुख उपचार है। यह मन पर नियंत्रण पाने और उसे अस्वस्थ इच्छाओं और विचार-प्रणालियों से मुक्त करने पर केंद्रित होता है। इसकी विधियों में निम्नलिखित शामिल हैं:

  • परामर्श और मार्गदर्शन: भावनात्मक आघात, तनाव और संबंधों की समस्याओं का समाधान करने के लिए, सेक्सोलॉजिस्ट डॉक्टर का परामर्श व मार्गदर्शन आवश्यक है।
  • ध्यान और माइंडफुलनेस: मन को शांत करने और चिंता कम करने के लिए, आयुर्वेद हमेशा योग, व्यायाम, ध्यान, और माइंडफुलनेस प्रक्रिया पर हमेशा ध्यान केंद्रित करता है।
  • योग और प्राणायाम: श्रोणि क्षेत्र में रक्त परिसंचरण में सुधार, तनाव कम करने और तंत्रिका तंत्र को संतुलित करने के लिए विशिष्ट योग आसन और श्वास व्यायाम (प्राणायाम) की सलाह दी जाती है। यह समस्त स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण कार्य है।

आहार और जीवनशैली में बदलाव:

  • आहार: आयुर्वेद हमेशा शरीर और मन को पोषण देने वाला संतुलित आहार आवश्यक है। इसमें ओज और शुक्र धातु बढ़ाने वाले खाद्य पदार्थ शामिल किये जाते हैं, जैसे दूध, घी, बादाम, खजूर और कुछ विशेष मसाले।
  • जीवनशैली: तनाव कम करना, नियमित नींद लेना और शारीरिक गतिविधियों में शामिल होना ज़रूरी माना जाता है। आयुर्वेद एक स्वस्थ और प्रेमपूर्ण रिश्ते के महत्व पर भी ज़ोर देता है, क्योंकि भावनात्मक जुड़ाव के बिना यौन क्रिया को कमज़ोर माना जाता है।

हर्बल उपचार: आयुर्वेदिक सेक्सोलॉजिस्ट चिकित्सक विभिन्न प्रकार की जड़ी-बूटियों का उपयोग करते हैं जो अपने कामोत्तेजक और तंत्रिका-शक्तिवर्धक गुणों के लिए जानी जाती हैं। इनमें से कुछ सबसे आम हैं, जो निम्नलिखित है:

  • अश्वगंधा: इस जड़ी-बूटी को एक एडाप्टोजेन के रूप में जाना जाता है, जो शरीर को तनाव और चिंता का प्रबंधन करने में मदद करता है, और इसका उपयोग जीवन शक्ति बढ़ाने और यौन इच्छा और प्रदर्शन में सुधार करने के लिए किया जाता है।
  • शिलाजीत: यह एक खनिज युक्त पदार्थ है जिसका उपयोग शक्ति, सहनशक्ति और समग्र जीवन शक्ति को बढ़ाने के लिए किया जाता है।
  • शतावरी: यह औषधीय पौधा पुरुषों और महिलाओं दोनों के लिए एक शक्तिशाली प्रजनन टॉनिक है, इसे शांत और पौष्टिक माना जाता है।
  • कौंच बीज (मुकुना प्रुरिएंस): मुख्य रूप से, इसका उपयोग व्यक्ति में उसके कामेच्छा और मनोदशा में सुधार के लिए किया जाता है।

संक्षेप में, आयुर्वेद मनोवैज्ञानिक और यौन समस्याओं को एक व्यापक प्रणालीगत असंतुलन का हिस्सा मानता है। इसलिए, इसका उपचार समग्र होता है, जो मन को शांत करने, दोषों में संतुलन बहाल करने, शरीर को पोषण देने और समग्र जीवन शक्ति को मजबूत करने पर केंद्रित है।

Ayurvedic Sexologist in Patna

डॉसुनील दुबे मनोवैज्ञानिक यौन समस्याओं का इलाज कैसे करते हैं?

डॉ. सुनील दुबे भारत के सीनियर व अग्रणी आयुर्वेदिक सेक्सोलॉजिस्ट हैं जो यौन रोग के मानसिक और शारीरिक, दोनों कारणों का समाधान करके मनो-यौन समस्याओं का व्यापक उपचार प्रदान करते हैं। वे दुबे क्लिनिक में प्रैक्टिस करते हैं, जो पारंपरिक और आधुनिक आयुर्वेदिक प्रणालियों के व्यापक मिश्रण का उपयोग करता है। वे इस क्लिनिक में सभी प्रकार के गुप्त व यौन रोगियों का इलाज करते है, एवं परामर्श का विशेष सुविधा प्रदान करते है।

डॉ. सुनील दुबे का यौन रोगियों के उपचार हेतु दृष्टिकोण समग्र और बहुआयामी होता है, जो निम्नलिखित प्रमुख क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करता है:

मूल कारण को समझना: वे सबसे पहले मरीज़ का मूल्यांकन करते हैं ताकि अंतर्निहित स्थितियों का पता लगाया जा सके, जो शारीरिक, मनोवैज्ञानिक या दोनों का संयोजन हो सकती हैं। वे मानते हैं कि प्रदर्शन संबंधी चिंता, तनाव, अवसाद, कम आत्मसम्मान, रिश्तों में टकराव और अतीत में यौन आघात जैसे मनोवैज्ञानिक कारक यौन रोग में महत्वपूर्ण योगदान कर सकते हैं।

आयुर्वेदिक चिकित्सा: डॉ. दुबे चिकित्सकीय रूप से सिद्ध आयुर्वेदिक चिकित्सा प्रदान करते हैं। यह उपचार तीन दोषों (वात, पित्त और कफ) को संतुलित करने पर केंद्रित है, जिनके बारे में उनका मानना है कि ये कम कामेच्छा जैसी स्थितियों के लिए ज़िम्मेदार कारक हैं।

  • वात को संतुलित करने से चिंता, अवसाद और घबराहट को नियंत्रित करने में मदद मिलती है।
  • पित्त को संतुलित करने से चिड़चिड़ापन और क्रोध को नियंत्रित करने में मदद मिलती है।
  • कफ को संतुलित करने से सुस्ती और प्रेरणा की कमी को नियंत्रित करने में मदद मिलती है।

यौन परामर्श और चिकित्सा: डॉ. दुबे यौन समस्याओं के मनोवैज्ञानिक पहलुओं को संबोधित करने के लिए यौन परामर्श और चिकित्सा की सुविधा प्रदान करते हैं। इसमें शामिल हैं:

  • मरीजों को उनकी मनो-यौन कठिनाइयों की जड़ को समझने में मदद करना।
  • रोगियों को यौन क्रिया के बारे में शिक्षित करना।
  • कठिनाइयों से निपटने के लिए मार्गदर्शन और तकनीकें प्रदान करना।
  • तनाव, रिश्तों की समस्याओं और भावनात्मक जुड़ाव की कमी जैसे मुद्दों को दूर करने के लिए युगल चिकित्सा भी प्रदान करते है।

अतिरिक्त दिशा निर्देश व सुझाव:

डॉ. दुबे यौन स्वास्थ्य में सुधार के लिए जीवनशैली में कई बदलाव करने की भी सलाह देते हैं, जिनमें शामिल हैं:

  • संवाद: वे जोड़ों को खुलकर और ईमानदारी से संवाद करने की सलाह देते हैं।
  • तनाव कम करना: वे तनाव और अवसाद को प्रबंधित करने के महत्व पर ज़ोर देते हैं।
  • स्वस्थ आदतें: वे स्वस्थ आहार, नियमित व्यायाम और अत्यधिक शराब पीने और धूम्रपान जैसी अस्वास्थ्यकर आदतों से बचने की सलाह देते हैं।
  • फोरप्ले और तकनीकें: वे फोरप्ले पर अधिक समय बिताने के लिए प्रोत्साहित करते हैं और "स्टार्ट-स्टॉप" और "स्क्वीज़" विधियों जैसी तकनीकों का सुझाव देते हैं।

!!!अधिक जानकारी के लिएहेल्पलाइन नंबर पर संपर्क करें या क्लिनिक पर जाएँ!!!

डॉ. सुनील दुबे (दुबे क्लिनिक)

भारत का प्रमाणित आयुर्वेद और सेक्सोलॉजी चिकित्सा विज्ञान क्लिनिक

हेल्पलाइन या व्हाट्सएप नंबर: +91 98350-92586

स्थित - लंगर टोली, चौराहा, पटना-04

क्लिनिक का समय: सुबह 8:00 बजे से रात 8:00 बजे तक (प्रतिदिन)

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