Understanding the perfect Treatment Plan for Erectile Dysfunction: Dr. Sunil Dubey
स्तंभन दोष, जिसे नपुंसकता का एक रूप माना जाता है, एक आम यौन समस्या जो उम्र बढ़ने के साथ बढ़ती है। आज के समय में, यह समस्या सभी उम्र के वयस्क पुरुषों में देखने को मिल रही है। जैसा कि, हम सभी जानते है कि गुप्त व यौन समस्याओं की चुनौतियों का सामना करना वास्तव में, एक कठिन स्थिति है। फिर भी, नैसर्गिक रूप से देखे तो, मानव कामुकता एक प्राकृतिक घटना है जो सभी लोगो के जीवन में विधमान होती है। आज का हमारा विषय, स्तंभन दोष के उपचार हेतु लोगो को सही जानकारी व मार्गदर्शन प्रदान करना है। इस विषय-वस्तु पर, विश्व प्रसिद्ध आयुर्वेदाचार्य व समाज सेवी डॉ. सुनील दुबे ने अपने दैनिक अभ्यास के अनुभव, शोध, व अध्ययन को हमारे साथ साझा किया है।
डॉ. सुनील दुबे, जो कि पिछले साढ़े तीन दशकों से पटना के सर्वश्रेष्ठ सेक्सोलॉजिस्ट डॉक्टर रहे है, ने पुरुषों व महिलाओं में होने वाले विभिन्न गुप्त व यौन समस्याओं पर अपना सफल शोध किया है। आयुर्वेद व सेक्सोलोजी के पेशे में उनका योगदान बहुत हद तक लोगो की उनकी यौन समस्याओं को हल करने में सफल रहा है। वे एक प्रामाणिक आयुर्वेदिक डॉक्टर है, जिन्हे मानव कामुकता व इसके दोष में विशेषज्ञता हासिल है। वे भारत के पहले ऐसे आयुर्वेदिक सेक्सोलॉजिस्ट डॉक्टर है, जिन्हे भारतीय रिसर्च कॉउन्सिल ने भारत गौरव अवार्ड से सम्मानित किया है। विदेशो में भी उनकी चर्चा होती है और खासकर दुबई सरकार और यूक्रेन के राजदूत ने उन्हें सम्मानित भी किया है।
चलिए आज के सत्र को आगे बढ़ाते हैं, जिसमें उन्होंने इरेक्टाइल डिस्फंक्शन (नपुंसकता) के लिए एलोपैथिक और आयुर्वेदिक उपचार के महत्व को बताया गया है। जैसा कि हमें पता होना चाहिए कि यौन समस्या का सटीक इलाज केवल आयुर्वेद में ही उपलब्ध है, लेकिन लोगों की जिज्ञासा और जानकारी को देखते हुए उन्होंने दोनों उपचारों की जानकारी प्रस्तुत की है। दुबे क्लिनिक भारत का सबसे विश्वसनीय आयुर्वेद और सेक्सोलॉजी चिकित्सा विज्ञान क्लिनिक है, जो पिछले छह दशकों से समाज के सभी लोगों की सेवा कर रहा है। डॉ. सुनील दुबे और इस क्लिनिक के सभी सदस्य हमेशा उन सभी लोगों का समर्थन करते हैं जो अपनी गुप्त और यौन समस्या को जड़ से मिटाना चाहते हैं।
यौन समस्या की जटिलताएं व सेक्सोलॉजिस्ट का चयन:
क्या आप अपने यौन जीवन में इरेक्टाइल डिसफंक्शन की समस्या से जूझ रहे हैं? आमतौर पर, यह यौन समस्या आपके जीवन में गहराई से जुड़ी होती है, जिससे आपके वैवाहिक जीवन में तनाव, निराशा और रिश्तों में समस्याएँ पैदा होती हैं। बहुत सारे समाज में गुप्त व यौन समस्या को नजरंदाज किया जाता है, जिसका मूल कारण यौन शिक्षा में कमी, मानव कामुकता के बारे में संकोच, कठोर परिवेश का समावेशन, और खुद के प्रति यौन स्वास्थ्य के बारे में सही जानकारी की कमी होती है। जब व्यक्ति अपने जीवन में किसी भी प्रकार का यौन समस्या का सामना करता है, तब उसके पास इसे व्यक्त करने के लिए सही परिवेश या वातावरण नहीं मिल पाता है। जिस कारण, व्यक्ति इसे छुपाना चाहता है जिससे उसके स्वाभिमान को ठेस न लगे। लेकिन इसका परिणाम, अंदर-ही-अंदर उसके शारीरिक व मानसिक स्वास्थ्य को परेशान करते रहती है। आज के समय में, क्लीनिकल डाटा का सर्वे से पता चला है कि केवल 5-10% लोग ही अपने यौन स्वास्थ्य के बारे में, किसी पेशेवर से पहले चरण में सलाह लेते है। बाकी 90% लोग, जब पानी सिर से ऊपर निकलने लगते है, तब उनसे सलाह लेने की सोचते है।
जो व्यक्ति अपने यौन समस्या के निदान के लिए तैयार होता है, तब उसके सामने कुछ चुनातियाँ होती है जैसे कि सेक्सोलॉजिस्ट की जानकारी, सही दवा का चयन, और पारिवारिक जीवन के प्रति दायित्व। अगर आप भी अपने गुप्त या यौन समस्या के निदान हेतु सही सेक्सोलॉजिस्ट या यौन स्वास्थ्य सेवा पेशेवर को चुनने को लेकर असमंजस में हैं, तब यह जानकारी आपको बहुत हद तक मदद करती है। किसी भी यौन समस्या के उपचार के लिए बाजार में बहुत सारे दवाएं और चिकित्सा की सुविधाएं उपलब्ध है। लोगो का अपना बजट और समस्या के अनुसार, अपने सेक्सोलॉजिस्ट डॉक्टर और दवा को चुनना होता है। इस स्थिति में, आज का डिजिटल दुनिआ उनकी बहुत हद तक मदद करती है।
गुप्त व यौन समस्या के सटीक उपचार के लिए, लोग अपने सुविधानुसार इसका चयन करते है। भारत में, मुख्य रूप से देखा जाय तो कोई भी व्यक्ति एलोपैथी को ज्यादा महत्व देते है और बाकि चिकित्सा व्यवस्था जैसे कि आयुर्वेदा को कम करके आंकते है। लेकिन हकिकत यह है कि दोनों की उपचार प्रणाली एक दूसरे से काफी भिन्न है। एलॉपथी लक्षणों के आधार पर उपचार निश्चित करता है जबकि आयुर्वेद कारणों के आधार पर। यही कारण है, आयुर्वेद किसी भी यौन समस्या को रामबाण इलाज प्रदान करता है, जो व्यक्ति को प्रकृति से भी जोड़े रखने का कार्य करती है। लोगो को एलोपैथी उपचार के रुझान के प्रति इसका त्वरित परिणाम है जो समस्या को दबाकर कम कर देती है। आयुर्वेद के प्रति लोग तब आते है, जब उनके पास कोई अन्य विकल्प नहीं होता। खैर, प्रत्येक चिकित्सा व उपचार का अपना-अपना महत्व होता है। यह व्यक्ति के सोच व अर्थ पर निर्भर करता है कि वह किस चिकित्सा व्यवस्था को अपनाना चाहता है।
यौन स्वास्थ्य सेवा पेशेवर (सेक्सोलॉजिस्ट) के बारे में:
क्या आप अपनी यौन समस्या का सुरक्षित तरीके से इलाज करना चाहते हैं, लेकिन अपने इलाज के लिए सही सेक्सोलॉजिस्ट चुनने को लेकर असमंजस में हैं? जैसा कि हम जानते हैं, आयुर्वेद में सभी यौन रोगों का शत-प्रतिशत इलाज है, लेकिन यह समग्र स्वास्थ्य को मद्देनज़र रखते हुए, अपने सकारात्मक प्रभाव को दिखाने में समय लेता है। किसी ने कहा है कि एलोपैथी यौन समस्या से निपटने का तेज़ तरीका प्रदान करती है। इन बातों के कारण, आप सही सेक्सोलॉजिस्ट और चिकित्सा विशेषज्ञों के चुनाव को लेकर असमंजस में हैं, क्या करें और किससे मदद लें, यह आपके लिए एक प्रश्नचिह्न बना हुआ है।
ख़ैर अब चिंता करने की जरुरत नहीं है, जैसा कि हम जानते हैं कि यौन समस्या का समाधान हेतु, इसे किसी से शेयर करना एक मुश्किल काम हो सकता है और लोग अपनी समस्या किसी के साथ साझा करने में सहज महसूस नहीं कर पाते हो। फिर भी, स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से, अपने डॉक्टर से चिकित्सा उपचार लेना सबसे अच्छा तरीका है, क्योकि वे एक पेशेवर होते है जिन्हे इस मानव कामुकता व विकार में विशेषज्ञता होती है। ऐसी स्थिति में, केवल एक योग्य व प्रामाणिक क्लिनिकल सेक्सोलॉजिस्ट ही आपको उपचार और मार्गदर्शन का एक सुरक्षित और प्रभावी तरीका प्रदान करने में मददगार साबित होता है।
एक सेक्सोलॉजिस्ट मानव कामुकता, यौन विज्ञान, यौन विकार, यौन अभिविन्यास, लिंग-पहचान, यौन इच्छा, प्रजनन स्वास्थ्य समस्याओं और शरीर रचना विज्ञान के अध्ययन का विशेषज्ञ होता है। वह यौन समस्याओं से निपटने के लिए उपचार, दवा और परामर्श के रूप में अपनी सेवाएँ प्रदान करने के लिए किसी क्लिनिक या अस्पताल में प्रैक्टिस करता है। विभिन्न चिकित्सा संकायों को देखें तो वे अपने-अपने चिकित्सा व्यवसायों में विशेषज्ञता रखते हैं, जैसे- एलोपैथी, आयुर्वेद और होम्योपैथी। आज के सत्र में हम इरेक्टाइल डिसफंक्शन समस्या के उपचार के बारे में चर्चा करेंगे। आयुर्वेद, एलोपैथी जैसी अन्य चिकित्सा पद्धतियों से कैसे अधिक लाभकारी होते है और इसके क्या परिणाम होते है।
डॉ. सुनील दुबे कहते हैं:
विश्व प्रसिद्ध आयुर्वेदाचार्य डॉ. सुनील दुबे, जो बिहार के सर्वश्रेष्ठ सेक्सोलॉजिस्ट डॉक्टर हैं, कहते हैं कि स्वास्थ्य और इसके स्थितियों के दृष्टिकोण से हरेक दवा का अपना महत्व होता है। यह व्यक्ति के प्रकृति व विकृति पर निर्भर करता है। एलोपैथी, आयुर्वेद या होम्योपैथी चिकित्सा के महत्व को कोई भी नज़रअंदाज़ नहीं कर सकता। लेकिन यौन चिकित्सा के महत्व को देखते हुए, आयुर्वेद की भूमिका अन्य चिकित्सा पद्धतियों से कई गुना ज़्यादा बढ़ जाती है, क्योकि मानव कामुकता एक प्राकृतिक घटना है। आयुर्वेदिक उपचार का मुख्य कारण इसका समग्र दृष्टिकोण और समग्र स्वास्थ्य कल्याण से सम्बन्धित होता है जो इस चिकित्सा व्यवस्था को समृद्ध बनाता है।
मानव कामुकता एक प्राकृतिक घटना है जहां यौन समस्याएं शारीरिक या मनोवैज्ञानिक कारकों के रूप में एक बड़ी बाधा बन जाती हैं जो यौन प्रतिक्रिया चक्र को बाधित करती हैं। यौन विकार की स्थिति में, एक व्यक्ति इच्छा, उत्तेजना, संतुष्टि और दर्द के कारण अपने यौन जीवन से जूझ सकता है। उनका कहना है कि इरेक्टाइल डिसफंक्शन (नपुंसकता) एक शारीरिक यौन विकार है जिसमें व्यक्ति यौन गतिविधि, विशेष रूप से प्रवेश के लिए उचित इरेक्शन प्राप्त करने या बनाए रखने में असमर्थ होता है। सेक्सोलॉजी की चिकित्सा शब्दावली के अनुसार, इरेक्टाइल डिसफंक्शन कुछ विशिष्ट परिस्थितयो में ज़्यादातर देखने को मिलते हैं, जिनमे वैस्कुलर, हार्मोनल, न्यूरोजेनिक, साइकोजेनिक, और दवा-प्रेरित सामान्य है। किस प्रकार का इरेक्टाइल डिसफंक्शन किसी व्यक्ति को प्रभावित करता है, यह निदान और परामर्श सत्र के दौरान पूरी तरह से स्पष्ट हो जाता है।
स्तंभन दोष (ईडी) के लिए एलोपैथिक और आयुर्वेदिक उपचारों में अंतर:
डॉ. सुनील दुबे कहते हैं कि इरेक्टाइल डिसफंक्शन उम्र बढ़ने के साथ पुरुषों में एक आम समस्या है जिसका इलाज एलोपैथिक (पश्चिमी) और आयुर्वेदिक, दोनों तरह की दवाओं से किया जा सकता है। प्रत्येक चिकित्सा पद्धति का अपना दर्शन, तरीके, फायदे और संभावित नुकसान होते हैं। इस सत्र में, वे इरेक्टाइल डिसफंक्शन के इलाज के लिए आयुर्वेद और एलोपैथी की तुलना करते हुए अपने अनुभव साझा करते हैं, जो इस प्रकार हैं:
एलोपैथी (पश्चिमी चिकित्सा):
एलोपैथी पश्चिमी चिकित्सा की एक ऐसी प्रणाली है जो प्रमाण-आधारित विधियों, औषधियों और शल्य चिकित्सा प्रक्रियाओं का उपयोग करके विशिष्ट रोगों और उनके लक्षणों का उपचार करती है। किसी गंभीर या आपातकालीन स्थिति में, यह सबसे प्रभावी उपचारों में से एक है। इसके अलावा, एलोपैथिक सेक्सोलॉजिस्ट भी होते हैं जो लक्षणों के आधार पर यौन समस्याओं का इलाज करते हैं।
यौन समस्याओं के लिए एलोपैथी उपचार पद्धति:
लक्षणों से राहत: एलोपैथिक उपचार मुख्य रूप से स्तंभन दोष (ईडी) के शारीरिक तंत्र को सीधे संबोधित करने पर केंद्रित होते हैं, जो अक्सर पेनिले में अपर्याप्त रक्त प्रवाह से संबंधित होता है।
दवाएँ: सबसे आम उपचार मौखिक दवाएँ हैं जिन्हें पीडीई5 अवरोधक कहा जाता है, जैसे सिल्डेनाफिल (वियाग्रा), टैडालाफिल (सियालिस), वर्डेनाफिल और अवानाफिल। ये दवाएँ यौन उत्तेजना के जवाब में मांसपेशियों को आराम देकर और पेनिले तथा जननांग क्षेत्र में रक्त प्रवाह बढ़ाकर काम करती हैं।
अन्य उपचार: जब मौखिक दवाएं अप्रभावी या प्रतिकूल हों, तो अन्य विकल्प ये हैं:
- इंजेक्शन: एल्प्रोस्टाडिल जैसी दवाओं को सीधे पुरुष के पेनिले में इंजेक्ट किया जाता है।
- सपोसिटरी: एल्प्रोस्टाडिल को मूत्रमार्ग में सपोसिटरी के रूप में भी दिया जा सकता है।
- वैक्यूम इरेक्शन डिवाइस (पंप): ये उपकरण पेनिले में रक्त खींचने के लिए एक वैक्यूम बनाते हैं।
- सर्जरी: पेनिले प्रत्यारोपण उन पुरुषों के लिए एक सर्जिकल विकल्प है जिन पर अन्य उपचारों का कोई असर नहीं होता।
- हार्मोन थेरेपी: यदि यह कम टेस्टोस्टेरोन के स्तर के कारण होता है, तो इस यौन समस्या से निपटने के लिए टेस्टोस्टेरोन रिप्लेसमेंट थेरेपी का उपयोग किया जा सकता है।
चूंकि एलोपैथिक दवा के अपने फायदे और नुकसान होते हैं, इसलिए यह समझना महत्वपूर्ण है कि एलोपैथी दवा उपचार के दौरान या बाद में कैसा परिणाम देती है।
एलोपैथिक उपचार के प्रभाव:
- तेज़ असर: कई मौखिक दवाएँ 30 मिनट से एक घंटे के भीतर स्तंभन (इरेक्शन) पैदा कर सकती हैं।
- उच्च प्रभावकारिता: कई पुरुषों के लिए इन उपचारों की सफलता दर उच्च है।
- वैज्ञानिक समर्थन: एलोपैथिक दवाओं की प्रभावकारिता और सुरक्षा व्यापक नैदानिक परीक्षणों और शोध द्वारा समर्थित किया जाता है, और विश्वसनीय निकायों द्वारा विनियमित होता हैं।
- विकल्पों की विस्तृत श्रृंखला: व्यक्ति के स्वास्थ्य और उपचार के प्रति प्रतिक्रिया के आधार पर कई उपचार पथ उपलब्ध हैं।
एलोपैथिक उपचार के नुकसान:
- दुष्प्रभाव: मुँह से ली जाने वाली दवाओं से सिरदर्द, चेहरे पर लालिमा, पेट खराब होना, नाक बंद होना और दृष्टि में बदलाव जैसे दुष्प्रभाव हो सकते हैं। नियमित या कुछ दवाएं हृदय स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकती हैं।
- स्थायी इलाज नहीं: इरेक्टाइल डिसफंक्शन के अधिकांश एलोपैथिक उपचार उपचारात्मक नहीं होते; ये अस्थायी राहत प्रदान करते हैं और इन्हें यौन क्रिया से पहले लेना आवश्यक होता है।
- दवाओं का परस्पर प्रभाव: इरेक्टाइल डिसफंक्शन की दवाएं उन पुरुषों के लिए खतरनाक हो सकती हैं जो हृदय की समस्याओं या अन्य विशिष्ट स्वास्थ्य समस्याओं के लिए नाइट्रेट्स लेते हैं।
- मूल कारण का समाधान नहीं करती: एलोपैथी अक्सर मूल कारण (जैसे, तनाव, चिंता या अन्य स्वास्थ्य समस्याएं) के बजाय लक्षण (इरेक्टाइल डिसफंक्शन) का इलाज करती है।
आयुर्वेद (भारतीय चिकित्सा पद्धति):
भारत के सर्वश्रेष्ठ सेक्सोलॉजिस्टों में से एक, डॉ. सुनील दुबे कहते हैं कि आयुर्वेद एक पारंपरिक भारतीय चिकित्सा पद्धति है जो समग्र दृष्टिकोण अपनाती है और इसका उद्देश्य प्राकृतिक उपचारों, आहार और जीवनशैली में बदलाव के माध्यम से शरीर के त्रिदोषों (वात, पित्त और कफ) के संतुलन को बहाल करना है। यह न केवल लक्षणों का इलाज करता है, बल्कि समग्र स्वास्थ्य का ध्यान रखते हुए यौन समस्याओं के वास्तविक कारणों का भी समाधान करता है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि कई एलोपैथिक डॉक्टर भी अपनी यौन समस्याओं के इलाज के लिए दुबे क्लिनिक में डॉ. सुनील दुबे से परामर्श लेते हैं।
यौन समस्याओं के लिए आयुर्वेदिक उपचार दृष्टिकोण:
समग्र और मूल कारण: आयुर्वेद स्तंभन दोष को शरीर की ऊर्जा में असंतुलन या अंतर्निहित स्वास्थ्य समस्याओं (मधुमेह, हृदय संबंधी समस्याएं, अन्य) का परिणाम मानता है। आयुर्वेदिक उपचार मूल कारण को दूर करके समग्र स्वास्थ्य को बहाल करने पर केंद्रित होता है। यह मन और शरीर के बीच के संबंध को समझता है और आत्मा की आवश्यकताओं के अनुरूप कार्य करता है।
हर्बल उपचार: आयुर्वेदिक चिकित्सक (सेक्सोलॉजिस्ट) विभिन्न प्रकार की जड़ी-बूटियों और प्राकृतिक योगों का उपयोग करते हैं, जिन्हें अक्सर "वाजीकरण" (कामोत्तेजक) चिकित्सा और अन्य विशिष्ट हर्बल उपचार कहा जाता है। स्तंभन दोष के लिए उपयोग की जाने वाली सामान्य जड़ी-बूटियों में शामिल हैं:
- अश्वगंधा (भारतीय जिनसेंग)
- शिलाजीत
- सफेद मूसली
- कौंच बीज (मुकुना प्रुरिएन्स)
- गोक्षुरा (ट्राइबुलस टेरेस्ट्रिस)
जीवनशैली और आहार व विहार: आयुर्वेदिक उपचार के सबसे महत्वपूर्ण पहलुओं में से एक संतुलित आहार, व्यायाम (जैसे योग), तनाव कम करने की तकनीकें (ध्यान), नींद, और जीवनशैली में अन्य बदलाव शामिल होते हैं। इस यौन समस्या के लिए कुछ विशिष्ट व्यायामों की भी सलाह दी जाती है। स्तंभन दोष में वात दोष का असलंतुलन से संबंध रखता है जहां जीवनशैली में बदलाव ज्यादा महत्वपूर्ण होते है।
पंचकर्म: कुछ मामलों में, शरीर को शुद्ध करने और उसे उपचार के लिए तैयार करने के लिए पंचकर्म जैसे विषहरण उपचारों की सलाह दी जा सकती है। यह शारीरिक व मानसिक परेशानियों से राहत दिलाने का कार्य करता है।
आयुर्वेदिक उपचार के लाभ:
- प्राकृतिक और समग्र दृष्टिकोण: यह चिकित्सा प्राकृतिक अवयवों का उपयोग करता है और समग्र स्वास्थ्य और कल्याण में सुधार पर ध्यान केंद्रित करता है, जिसके सिंथेटिक दवाओं की तुलना में दुष्प्रभाव न के बराबर होते हैं। आयुर्वेदिक उपचार व्यक्तिगत होता है, जिसमे व्यक्ति के समस्या की प्रकृति व विकृति का विशेष ध्यान रखा जाता है।
- अंतर्निहित समस्याओं का समाधान: आहार, जीवनशैली और तनाव पर ध्यान केंद्रित करके, इसका उद्देश्य समस्या के मूल कारण का इलाज करना है।
- संभावित दीर्घकालिक लाभ: एक समग्र दृष्टिकोण से यौन स्वास्थ्य और समग्र जीवन शक्ति में दीर्घकालिक सुधार हो सकता है।
आयुर्वेदिक उपचार का प्रभाव:
- नियमन का अभाव: आयुर्वेदिक उपचारों पर अक्सर एलोपैथिक दवाओं जितना कठोर नियंत्रण नहीं होता, जिससे गुणवत्ता, खुराक और संभावित संदूषण (जैसे, भारी धातुएँ) को लेकर चिंताएँ पैदा होती हैं। उपचार के लिए किसी योग्य, अनुभवी और प्रतिष्ठित आयुर्वेद विशेषज्ञ, सेक्सोलॉजिस्ट डॉक्टर से परामर्श लेना ही श्रेयकर होता है।
- सीमित नैदानिक अनुसंधान: हालाँकि कुछ जड़ी-बूटियों पर कुछ आशाजनक शोध हुए हैं, लेकिन मनुष्यों में स्तंभन दोष के लिए कई आयुर्वेदिक उपचारों की प्रभावकारिता और सुरक्षा को निश्चित रूप से साबित करने वाले वैज्ञानिक प्रमाण अक्सर सीमित हो सकते हैं। अतः आयुर्वेद के विशेषज्ञ ही गुप्त व यौन समस्या के लिए सटीक आयुर्वेदिक सूत्रीकरण करने में सक्षम होते है।
- धीमे परिणाम: आयुर्वेदिक उपचारों के परिणाम आमतौर पर एलोपैथिक दवाओं की तुलना में अधिक समय लेते हैं। लेकिन यह सच है कि सफलता केवल धीमे और निरंतर प्रयासों से ही मिलती है। यह यौन समस्या के अतिरिक्त समस्त स्वास्थ्य के कल्याण भी ध्यान केंद्रित करता है।
- अन्य दवाओं के साथ परस्पर क्रिया: हर्बल उपचारों में निर्धारित दवाओं के साथ परस्पर क्रिया का थोड़ा बहुत जोखिम हो सकता है, इसलिए किसी स्वास्थ्य सेवा पेशेवर से परामर्श करना ज़रूरी है।
निष्कर्ष:
स्तंभन दोष (नपुंसकता) या किसी भी यौन समस्या के इलाज के लिए आयुर्वेद या एलोपैथी में से चुनाव व्यक्तिगत ज़रूरतों, प्राथमिकताओं और स्वास्थ्य स्थिति पर निर्भर करता है। आयुर्वेदिक उपचार का शरीर पर दुष्प्रभाव नहीं होता और साथ-ही-साथ यह समस्त स्वास्थ्य के कल्याण पर ध्यान केंद्रित करता है।
- एलोपैथी अक्सर उन लोगों के लिए पसंदीदा विकल्प होती है जो तुरंत परिणाम पाने के लिए तेज़ और वैज्ञानिक रूप से सिद्ध समाधान चाहते हैं। हालाँकि, इसके संभावित दुष्प्रभावों और इस तथ्य के बारे में जागरूक होना ज़रूरी है कि यह अक्सर लक्षणों पर आधारित होती है, उपचारात्मक नहीं। यह समस्या को एक समय तक दबाकर रखती है, जिससे इसके दवा के सेवन के बाद स्थिति जस-की-तस बनी रह सकती है।
- आयुर्वेद उन लोगों के लिए एक वैकल्पिक विकल्प है जो एक समग्र, प्राकृतिक दृष्टिकोण पसंद करते हैं और अपनी जीवनशैली में दीर्घकालिक बदलाव करने को तैयार हैं। यह उन लोगों के लिए एक बेहतर विकल्प हो सकता है जिनकी स्तंभन दोष (नपुंसकता) तनाव, चिंता या सामान्य खराब स्वास्थ्य से संबंधित है। यह उपचार के दौरान पूर्ण सुरक्षा प्रदान करता है, जिससे व्यक्ति बेहतर महसूस करता है और प्रकृति के प्रति अधिक आकर्षित होता है। यह व्यक्ति के समस्या को एक लम्बे समय तक निवारण करने में सक्षम है।
हालाँकि, सुरक्षित और प्रभावी उपचार के लिए किसी योग्य और प्रमाणित सेक्सोलॉजिस्ट डॉक्टर से परामर्श लेना ज़रूरी है। दुबे क्लिनिक एक प्रमाणित आयुर्वेद और सेक्सोलॉजी चिकित्सा विज्ञान क्लिनिक है जो आयुर्वेद के आधुनिक उपचारों और समग्र दृष्टिकोण की मदद से पूर्णकालिक, सुरक्षित और प्रभावी उपचार प्रदान करता है। डॉ. सुनील दुबे और दुबे क्लिनिक के एक्सपर्ट टीम उन सभी लोगो की मदद करते है जो अपने यौन समस्या का रामबाण इलाज चाहते है।
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डॉ. सुनील दुबे (दुबे क्लिनिक)
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